Hail Monsoon

Hail Monsoon

 

Beyond the castle of dreams

A destination of bliss

Where desires fancies with charms

An aficionado state of art

Let the harmony beats among all

In the awe of mother nature’s rainfall 

The mesmerising essence of daffodils 

and adventurous rafting that thrills

Droplet that remained over the pot

Refreshed the soul and rejoices us a lot

Let the quixotic dreams be realistic 

The monsoon on which our peasants 

and the economy bank upon

We should pledge to save water

within our capacity to end the thirst 

 

Copyright – @tushnyamit

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पंचलाइट (Panch Light)- लेखक फणीश्वर नाथ रेणु

पंचलाइट एक हिन्दी कहानी है जिसके लेखक फणीश्वर नाथ रेणु हैं। यह कहानी रेणु के कहानी संग्रह ‘ठुमरी‘ में संकलित है। यह कहानी आंचलिक कहानियों कि श्रेणी में एक प्रमुख कहानी मानी जाती है।यह कहानी 1950 से 1960 के मध्य लिखी गयी थी

पिछले पंद्रह महीने से दंड-जुर्माने के पैसे जमा करके महतो टोली के पंचों ने पेट्रोमेक्स खरीदा है इस बार, रामनवमी के मेले में | गाँव में सब मिलाकर आठ पंचायतें हैं | हरेक जाति की अलग अलग ‘सभाचट्टी  ‘ है | सभी पंचायतों में दरी, जाजिम , सतरंजी और पेट्रोमेक्स हैं – पेट्रोमेक्स, जिसे गाँव वाले पंचलैट कहते हैं |

पंचलैट खरीदने के बाद पंचो ने मेले में ही तय किया – दस रुपये जो बच गए हैं, इससे पूजा सामग्री खरीद ली जाए – बिना नेम टेम के कल-कब्जे वाली चीज़ का पुन्याह नहीं करना चाहिए | अँगरेज़ बहादुर के राज में भी पुल बनाने के पहले बलि दी जाती थी |

मेले में सभी दिन-दहाड़े ही गाँव लौटे; सबसे आगे पंचायत का छडीदार पंचलैट का डिब्बा माथे पर लेकर और उसके पीछे सरदार, दीवान, और पंच वगैरह | गाँव के बाहर ही ब्रह्मण टोली के फुटंगी झा ने टोक दिया – कितने मे लालटेन खरीद हुआ महतो ?

…. देखते नहीं हैं, पंचलैट है! बामन टोली के लोग ऐसे ही बात करते हैं | अपने घर की ढिबरी को भी बिजली-बत्ती कहेंगे और दूसरों के पंचलैट को लालटेन |

टोले भर के लोग जमा हो गए | औरत-मर्द, बूढ़े-बच्चे सभी कामकाज छोड़कर दौड़ आये – चल रे चल ! अपना पंचलैट आया है, पंचलैट ! छड़ीदार अगनू महतो रह- रहकर लोगों को चेतावनी देने लगा – हाँ, दूर से, जरा दूर से ! छू-छा मत करो, ठेस न लगे |

सरदार ने अपनी स्त्री से कहा- सांझ को पूजा होगी; जल्द से नहा-धोकर चौका-पीढ़ा लगाओ |

टोले की कीर्तन-मंडली के मूलगैन ने अपने भगतिया पच्च्को को समझा कर कहा- देखो, आज पंचलैट की रौशनी मे कीर्तन होगा | बेताले लोगों से पहले ही कह देता हूँ , आज यदि आखर धरने में डेढ़-बेड़ हुआ, तो दूसरे दिन से एकदम बैकाट |

औरतों की मंडली मे गुलरी काकी गोसाईं का गीत गुनगुनाने लगी | छोटे-छोटे बच्चों ने उत्साह के मारे बेवजह शोरगुल मचाना शुरू किया |

सूरज डूबने के एक घंटा पहले ही टोले भर के लोग सरदार के दरवाजे पर आकर खड़े हो गए- पंचलैट, पंचलैट !
पंचलैट के सिवा और कोई गप नहीं, कोई दूसरी बात नहीं | सरदार ने  गुड़गुड़ी पीते हुआ कहा- दुकानदार ने पहले सुनाया, पूरे पांच कौड़ी पांच रुपया | मैंने कहा की दुकानदार साहेब मत समझिये की हम एकदम देहाती हैं | बहुत बहुत पंचलैट देखा है | इसके बाद दुकानदार मेरा मूंह देखने लगा | बोला, लगता है आप जाती के सरदार हैं | ठीक है, जब आप सरदार होकर खुद पंचलैट खरीदने आये हैं तो जाइए, पूरे पांच कौड़ी में आपको दे रहे हैं |

दीवान जी ने कहा — अलबत्ता चेहरा परखने वाला दूकानदार है | पंचलैट का बक्सा दूकान का नौकर देना नहीं चाहता था | मैंने कहा, देखिये दूकानदार साहेब, बिना बक्सा पंचलैट कैसे ले जायेंगे | दूकानदार ने नौकर को डांठते  हुए कहा, क्यों रें ! दीवान जी की आँख के आगे ‘धुरखेल’ करता है ; दे दो बक्सा |

टोले के लोगो ने अपने सरदार और दीवान को श्रद्धा-भरी निगाहों से देखा | छड़ीदार ने औरतों की मंडली को सुनाया – रास्ते मे सन्न-सन्न बोलता था पंचलैट |

लेकिन….ऐन मौके पर ‘लेकिन’ लग गया ! रुदल साह बनिए की दूकान से तीन बोतल किरासन तेल आया और सवाल पैदा हुआ, पंचलैट को जलाएगा कौन ?

यह बात पहले किसी के दिमाग में नहीं आई थी | पंचलैट खरीदने के पहले किसी ने न सोचा | खरीदने के बाद भी नहीं | अब पूजा की सामग्री चौकी पर सजी हुई है, किर्तनिया लोग खोल-ढोल-करताल खोल कर बैठे हैं, और पंचलैट पड़ा हुआ है | गाँव वालो ने आज तक कोई ऐसी चीज़ नहीं खरीदी, जिसमे जलाने-बुझाने की झंझट हो | कहावत है न, भाई रे, गाय लूं ? तो दुहे कौन ? ….लो मजा ! अब इस कल-कब्जे वाली चीज़ को कौन बाले ?

यह बात नहीं की गाँव भर मे कोई पंचलैट जलाने वाला नहीं | हरेक पंचायत मे पंचलैट है, उसके जलाने वाले जानकार हैं | लेकिन सवाल है कि पहली बार नेम-टेम करके, शुभ-लाभ करके, दूसरी पंचायत के आदमी की मदद से पंचलैट जलेगा? इससे तो अच्छा है कि पंचलैट पड़ा रहे | ज़िन्दगी भर ताना कौन सहे ! बात-बात मे दूसरे टोले के लोग कूट करेंगे — तुम लोगों का पंचलैट पहली बार दूसरे के हाथ …..! न, न ! पंचायत की इज्जत का सवाल है | दूसरे टोले के लोगो से मत कहिये |

चारों ओर उदासी छा गयी | अन्धेरा बढ़ने लगा | किसी ने अपने घर मे आज ढिबरी भी नहीं जलाई थी | …..आखिर पंचलैट के सामने ढिबरी कौन बालता है |

सब किये-कराये पर पानी फिर रहा था | सरदार, दीवान और छड़ीदार कि मुंह मे बोली नहीं | पंचों के चेहरे उतर गए थे | किसी ने दबी आवाज़ मे कहा — कल-कब्जे वाली चीज़ का नखरा बहुत बड़ा होता है |

एक नौजवान ने आकर सूचना दी — राजपूत टोली के लोग हसतें- हसतें पागल हो रहे हैं | कहते हैं, कान पकड़ कर पंचलैट के सामने पांच बार उठो-बैठो, तुरंत जलने लगेगा |

पंचों ने सुनकर मन-ही-मन कहा — भगवान् ने हसने का मौका दिया है, हसेंगे नहीं ?  एक बूढ़े ने लाकर खबर दी — रूदल साह बनिया भारी बतंगड़ आदमी है | कह रहा है पंचलैट का पम्पू ज़रा होशियारी से देना |

गुलरी काकी की बेटी मुनरी के मुंह में बार-बार एक बात आकर मन में लौट जाती है | वह कैसे बोले ? वह जानती है कि गोधन पंचलैट बालना जानता है | लेकिन, गोधन का हुक्का-पानी पंचायत से बंद है | मुनरी कि माँ ने पंचायत से फरियाद की थी कि गोधन रोज उसकी बेटी को देखकर ‘सलम-सलम’ वाला सलीमा का गीत गाता है – हम तुमसे मोहब्बत करके सलम | पंचों की निगाह पर गोधन बहुत दिन से चढ़ा हुआ था | दूसरे गाँव से आकर बसा है गोधन, और अब तक टोले के पंचों को पान-सुपारी खाने के लिए भी कुछ नहीं दिया | परवाह ही नहीं करता | बस, पंचों को मौका मिला | दस रुपया जुर्माना | न देने से हुक्का-पानी बंद | ….आज तक गोधन पंचायत से बाहर है | उससे कैसे कहा जाए ! मुनरी उसका नाम कैसे ले ? और उधर जाती का पानी उतर रहा है |

मुनरी ने चालाकी से अपनी सहली कनेली के कान में बात दाल दी — कनेली ! …चिगो, चिध, -s -s , चीन….|

कनेली मुस्कराकर रहा गयी –गोधन…तो बंद है | मुनरी बोली –तू कह तो सरदार से |

‘गोधन जानता है पंचलैट बालना |’ कनेली बोली |

कौन, गोधन ? जानता है बालना ? लेकिन …. |

सरदार ने दीवान की ओर देखा और दीवान ने पंचों की ओर | पंचों ने एक मत होकर हुक्का-पानी बंद किया है | सलीमा का गीत गाकर आँख का इशारा मारने वाले गोधन से गाँव भर के लोग नाराज़ थे | सरदार ने कहा — जाति की बंदिश क्या, जबकि जाति की इज्जत ही पानी में बही जा रही है ! क्यों जी दीवान ?

दीवान ने कहा — ठीक है |

पंचों ने भी एक स्वर में कहा — ठीक है | गोधन को खोल दिया जाय |

सरदार ने छड़ीदार को भेजा | छड़ीदार वापस आकर बोला — गोधन आने को राज़ी नहीं हो रहा है | कहता है, पंचों की क्या परतीत है ? कोई कल-कब्ज़ा बिगड़ गया तो मुझे ही दंड जुर्माना भरना पड़ेगा |

छड़ीदार ने रोनी सूरत बना कर कहा — किसी तरह से गोधन को राज़ी करवाइए, नहीं तो कल से गाँव मे मुंह दिखाना मुश्किल हो जाएगा |

गुलरी काकी बोली — ज़रा मैं देखूं कहके |

गुलरी काकी उठ कर गोधन के झोपड़े की ओर गयी और गोधन को मना लाई | सभी के चेहरे पर नयी आशा की रोशनी चमकी | गोधन चुपचाप पंचलैट में तेल भरने लगा | सरदार की स्त्री ने पूजा सामग्री के पास चक्कर काटती हुई बिल्ली को भगाया | कीर्तन-मंडली के मूलगैन मुरछल के बालों को संवारने लगा | गोधन ने पूछा — इस्पिरिट कहाँ है ? बिना इस्पिरिट के कैसे जलेगा ?

…. लो मजा ! अब यह दूसरा बखेड़ा खड़ा हुआ | सभी ने मन ही मन सरदार, दीवान और पंचों की बुद्धि पर अविश्वास प्रकट किया — बिना बूझे-समझे काम करते हैं यह लोग | उपस्थित जन-समूह में फिर मायूसी छा गई | लेकिन, गोधन बड़ा होशियार लड़का है | बिना इस्पिरिट के ही पंचलैट जलाएगा | ….थोडा गरी का तेल ला दो | मुनरी दौड़कर गई और एक मलसी गरी का तेल ले आई | गोधन पंचलैट में पम्प देने लगा |

पंचलैट की रेशमी थैली मे धीरे-धीरे रौशनी आने लगी | गोधन कभी मुंह से फूंकता, कभी पंचलैट की चाबी घुमाता | थोड़ी देर के बाद पंचलैट से सनसनाहट की आवाज़ निकालने लगी और रोशनी बढती गई | लोगों के दिल का मैल दूर हो गया | गोधन बड़ा काबिल लड़का है |

अंत में पंचलैट की रोशनी से सारी टोली जगमगा उठी, तो कीर्तनिया लोगों ने एक स्वर में, महावीर स्वामी की जय-ध्वनि के साथ कीर्तन शुरू कर दिया | पंचलैट की रोशनी में सभी के मुस्कराते हुए चेहरे स्पष्ट हो गए | गोधन ने सबका दिल जीत लिया | मुनरी ने हरकत-भरी निगाह से गोधन की ओर देखा | आँखें चार हुई और आँखों ही आँखों मे बातें हुई – कहा सुना माफ़ करना ! मेरा क्या कसूर ?

सरदार ने गोधन को बहुत प्यार से पास बुला कर कहा — तुमने जाति की इज्जत रखी है | तुम्हारे सात खून माफ़ | खूब गाओ सलीमा का गाना |

गुलरी काकी बोली — आज रात में मेरे घर में खाना गोधन |

गोधन ने एक बार फिर मुनरी की ओर देखा | मुनरी की पलके झुक गई |

कीर्तनिया लोगो ने एक कीर्तन समाप्त कर जयध्वनि की — जय हो ! जय हो! ….पंचलैट के प्रकाश में पेड़-पौधों का पत्ता-पत्ता पुलकित हो रहा था |

source – http://arbitspeak.blogspot.in/2011/11/panch-light-by-renu.html

Wikipedia

 

 

GST (Goods or Services tax)

When GST or goods or services tax rolls out on July 1, it will be the biggest tax reform since Independence. GST will subsume a large number of central and state taxes into a single tax, paving the way for a common national market. From free flow of goods and services to elimination of cascading of taxes, the potential benefits to Indian economy are many. It is estimated that GST could raise GDP or gross domestic product growth by 1.5-2 per cent in the long term.
Here is a 10-point cheat-sheet:

GST is a destination-based tax, as against the present principle of origin based taxation. The new tax regime follows a multi-stage collection mechanism wherein tax is collected at every stage and the credit of tax paid (input tax credit) at the previous stage is available as a set-off at the next stage of transaction. This helps to eliminate “tax on tax” or the cascading impact of tax. GST shifts the tax incidence near to the consumer and benefits the industry through better cash flows and better working capital management. From consumer point of view, GST helps to bring down overall tax.
Input tax credit: This means that at the time of paying tax on output manufacturers or service providers, for example, can reduce the tax by the amount they have already paid on inputs. For example, a manufacturer’s total tax on output comes to Rs. 5,000 while tax paid on input (purchases) is Rs. 3,000. In this case, the manufacturer needs to deposit only Rs. 2,000 (Rs. 5,000 – Rs. 3,000) as tax, thus reducing the overall incidence of tax on final product. But credit available to the recipient (the manufacturer in this case) only if invoice is matched. So GST helps in checking evasion of taxes.
GST rates: GST rates on goods and services have been broadly classified into four tax rates: 5 per cent, 12 per cent, 18 per cent and 28 per cent. Some goods and services would be exempt. Precious metals like gold will attract a separate tax rate of 3 per cent. A cess will be levied over the peak rate of 28 per cent on specified luxury and sin goods. Under GST, businesses are required to file returns each month. But the government has let companies file late returns for the first two months so that they can adapt to a new online filing system.
CGST, SGST, IGST: The GST to be levied by the Centre would be called Central GST (CGST) and that to be levied by the States (including Union territories with legislature) would be called State GST (SGST). An Integrated GST (IGST) would be levied on inter-State supply (including stock transfers) of goods or services. This would be collected by the Centre. Import of goods would be treated as inter-State supplies and would be subject to IGST in addition to the applicable customs duties. Exports will be treated as zero-rated supplies which means no tax will be payable on exports of goods or services. However, exporters can claim input tax credit.
Who is liable to pay GST? Businesses with an annual turnover of Rs. 20 lakh (Rs. 10 lakh for special category states) would be exempt from GST. A composition scheme (to pay tax at a flat rate without input credits) is available to manufacturers and service providers having an annual turnover of up to Rs. 75 lakh. The composition scheme is optional.
Stocks in transition: On stocks unsold before GST rollout, manufacturers and retailers have been allowed to carry forward input tax credit for 90 days. On such goods they can claim as much as 60 per cent of the input tax credit on stocks lying unsold up to June 30.
Anti-profiteering mechanism: An authority will be set up to see that any reduction in rate of tax of any supply of goods or services for the benefit of input tax credit will be passed on the recipient by commensurate reduction in prices. Anti-profiteering clause in GST is a deterrent which is not intended to be used unless forced to, says Finance Minister.
Decision mechanism: GST Council will make recommendations on everything related to GST including laws, rules and rates etc. Union Finance Minister Arun Jaitley heads the panel while ministers of finance or taxation of each state are its members. Decisions in the Council are taken by a 75 per cent majority. Centre and a minimum of 20 states are required for majority because Centre would have one-third weightage of the total votes cast and all the States taken together would have two-thirds of weightage.
Not part of GST: Petroleum products such as petrol, diesel and aviation turbine fuel have been kept out of GST as of now. The GST Council will take a decision on it at a later date. Alcohol has also been kept out of GST.
Administrative control: To ensure single interface, all administrative control of 90 per cent of taxpayers having turnover below Rs. 1.5 crore would vest with state tax administration while 10 per cent with the central tax administration. Further, all administrative control over taxpayers having turnover above Rs. 1.5 crore will be divided equally between central and state tax administrations. States will be compensated for any revenue loss from GST implementation for five years.

Nirbhaya Verdict – A Condolence for Jyoti

File Photo of Nirbhaya’s mother (left) paying tributes at Rajghat in New Delhi on the occasion of her daughter’s fourth death anniversary.   | Photo Credit: Shiv Kumar Pushpakar.

 

‘Aggravating Circumstances,Brutal, Diabolic and Barbaric’, Says Supreme Court in hearing, Confirms Death To all 4 Convicts “

 

In 2012, the nation was shaken up by the news of a dastardly gangrape of a 23-year-old in a moving bus in the national capital. Late on a Sunday night on December 16, 2012, the victim along with her male companion were returning from a screening of the film Life of Pi in Saket. Both of them were waiting to hail an auto rickshaw for a ride back home at around 9.30 pm. Around this time, an off-duty charter bus driven by people not driving for commercial reasons passed them and offered to give them a ride to Dwarka from Munirka. Soon, the victim’s companion noticed the route taken by the driver was different than normal and the doors of the bus had been tightly shut.

When he objected to it, the bus occupants raised fingers at the boy and the girl saying why were they out at night so late. At this point, a scuffle ensued between the victim and her companion and the other occupants of the bus, which ultimately resulted in a bloody fight and the gang rape. The two victims were thrown out of the bus in half clothed and bloodied state. A passerby found them at 11 pm and rushed them to Safdurjang hospital where they were given immediate treatment. The victim remained in a critical condition until her death on December 29, in Singapore where she had been taken for further treatment. Her companion survived after being treated for a few broken ribs.

One of the accused, Ram Singh hanged himself in prison, while another person, who was a juvenile at the time of the crime, was convicted in August last year and will serve the maximum sentence of three years in a reform home.

 

The matter is been heard by the apex court bench headed by Justice Dipak Misra and consisting of Justices R Banumathi and Ashok Bhushan.

The convicts – Akshay, Pawan, Vinay Sharma and Mukesh – challenged the Delhi High Court order which had sentenced them to the gallows.Earlier, the trial court also had sentenced all the four convicts to death penalty.

 

 

Who is the best replacement for M.S. Dhoni as wicket keeper in test cricket and why?

Who is the best replacement for M.S. Dhoni as wicket keeper in test cricket and why? by Amit Kumar

Answer by Amit Kumar:

Well this a very interesting question in the cricket loving nation.

There are several candidates who are front runners in the race but in Test Cricket we need a player who should have patience ,courage and lots of determination .

So one needs to have a sufficient experience , some of them whom i see for next 2–3 years are :-

  1. Parthiv Patel – He got inducted in test team very early , he started cricket career before Dhoni did , recent consistent success in Ranji trophy and in IPL makes him top contender for this post.He can resolve opening woos for Team India .
  2. Dinesh Karthik – Another Biggie having vast experience in domestic circle and being a middle order batsman makes him a better choice in Test.
  3. Riddhiman Saha – Already he’s playing and performing well , so we can think of him for next 2–3 years playing for India.But his real test will be on Foreign soil which needs to tested yet.

Test matches are rarely played now a days i.e 5–6 tests per year (if we ignore last year 2016–2017 session, when India played 13 tests, which has been one of the rarest season).

After 2–3 years I have a feeling that 2 current Indian batsman who played in U-19 world cup 2016 can be among the best choice to replace MSD in test cricket.

  1. Ishan Kishan – Having such a wonderful U-19 world cup , top scorer from Jharkhand in Ranji after Ishank Jaggi , which led his team to qualify first time in Semifinal of Ranji Trophy . He has shown his excellent captaincy skills at U-19 and he’s cool like MSD .Presently he is blasting runs for Gujarat Lions. He is still 18 years old. He can open the inning as well as he can play in middle order as per team’s requirement.

Risabh Pant – He is among every one’s mind . He has impressed a lot . He’s a fearless cricketer. He has got all his praises from Cricket Gods like – Sachin ,Saurav, Sehwag etc. He has potential to hit any ball just like Dhoni . He has surely impressed with his batting skills and by his determination .He’s inning of 97 runs against Gujarat Lions has been termed as one of the finest and fearless inning of IPL .

It seems Indian wicket keeping for next coming 10 years seems to be in safe hands and competitive. However MS Dhoni is a legend and legends can never be replaced.

I wish all future cricketers best of luck who are going to Donn Dhoni’s gloves.

Jai Hind

Who is the best replacement for M.S. Dhoni as wicket keeper in test cricket and why?

Swachh Survekshan Rankings 2017

Swachh Survekshan Rankings 2017 is out . It was announced by Union Urban Development Minister Shri Venkaiah Naidu .Around 37 lakh citizens submitted their responses. The survey was conducted by the Quality Council of India.Last year’s survey ranked 73 cities across the country in which 1 lakh citizens had given their feedback.The cleanliness survey was carried out during January and February.

Cities were evaluated on five parameters – waste collection, solid-waste management, construction of toilets, sanitation strategies and behavior change communication.

The rankings are based on the data provided by municipal corporations, independent assessors and feedback from people. In all, 3.7 million citizens participated in the exercise.India’s most populous state Uttar Pradesh is also the dirtiest. Fifty of the 62 of its cities that were surveyed ranked below 300.

Swachh Survekshan Rankings
Rank 2017 Survey 2016 Survey
1 Indore Mysuru
2 Bhopal Chandigarh
3 Visakhapatnam Tiruchirapalli
4 Surat New Delhi
5 Mysuru Visakhapatnam
6 Tiruchirapalli Surat
7 New Delhi Rajkot
8 Navi Mumbai Gangtok
9 Tirupati Pimpri-Chinchwad
10 Vadodara Mumbai
11 Chandigarh Pune
12 Ujjain Navi Mumbai
13 Pune Vadodara
14 Ahmedabad Ahmedabad
15 Ambikapur Imphal
16 Coimbatore Panaji
17 Khargone Thane
18 Rajkot Coimbatore
19 Vijaywada Hyderabad
20 Gandhinagar Nagpur
21 Jabalpur Bhopal
22 Hyderabad Allahabad
23 Sagar Vijayawada
24 Murwara (Katni) Bhubaneshwar
25 Navsari Indore
26 Vapi Madurai
27 Gwalior Shimla
28 Warangal Lucknow
29 Mumbai Jaipur
30

 

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Suryapet

 

Varanasi

Gwalior